Saturday, August 10, 2013

सच्चा झूठ !

हर ख्वाब पूरा  नहीं होता , हर सपना भी अधूरा नहीं होता !
हर सुरखाब के पर नहीं होते ,हर राही  अपनी राह भी नहीं खोता



समंदर में हर कश्ती को साहिल नहीं मिलता ,
पर हर माझी नाव को मझदार में नहीं डुबोता !

हर उम्मीद कसौटी पर खरी नहीं उतरती ,
पर हर चाहत का फ़साना भी  नहीं बनता !

हर अरमान पर हक मेरा नहीं ,
पर हर कसूर भी तेरा नहीं होता !

कुछ सितम-ए -तकदीर ,कुछ गिले शिकवे ,
हर बात का भी माज़रा नहीं होता !


कुछ महफिलें तन्हाई की ,कुछ जलसे मायूसी के ,
हर शम्मा पे कुर्बान भी परवाना नहीं होता !

हर मरहम जख्म नहीं भरता ,
हर हरा जख्म भी गवारा नहीं होता !

कुछ उदास शामें यादों की बारात की ,
हर शादी के दुल्हे का सेहरा नहीं होता !

हर दरिया दर्द का गहरा नहीं होता ,
और हर गैर  शख्स , अनजान चेहरा नहीं होता !

अकेला निकल सकता था वो और कारवाँ भी बन जाता,
अगर वो तेरे लिए ठहरा नहीं होता , तेरे लिए ठहरा नहीं होता !


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