हर ख्वाब पूरा नहीं होता , हर सपना भी अधूरा नहीं होता !
हर सुरखाब के पर नहीं होते ,हर राही अपनी राह भी नहीं खोता
समंदर में हर कश्ती को साहिल नहीं मिलता ,
पर हर माझी नाव को मझदार में नहीं डुबोता !
हर उम्मीद कसौटी पर खरी नहीं उतरती ,
पर हर चाहत का फ़साना भी नहीं बनता !
हर अरमान पर हक मेरा नहीं ,
पर हर कसूर भी तेरा नहीं होता !
कुछ सितम-ए -तकदीर ,कुछ गिले शिकवे ,
हर बात का भी माज़रा नहीं होता !
कुछ महफिलें तन्हाई की ,कुछ जलसे मायूसी के ,
हर शम्मा पे कुर्बान भी परवाना नहीं होता !
हर मरहम जख्म नहीं भरता ,
हर हरा जख्म भी गवारा नहीं होता !
कुछ उदास शामें यादों की बारात की ,
हर शादी के दुल्हे का सेहरा नहीं होता !
हर दरिया दर्द का गहरा नहीं होता ,
और हर गैर शख्स , अनजान चेहरा नहीं होता !
अकेला निकल सकता था वो और कारवाँ भी बन जाता,
अगर वो तेरे लिए ठहरा नहीं होता , तेरे लिए ठहरा नहीं होता !
हर सुरखाब के पर नहीं होते ,हर राही अपनी राह भी नहीं खोता
समंदर में हर कश्ती को साहिल नहीं मिलता ,
पर हर माझी नाव को मझदार में नहीं डुबोता !
हर उम्मीद कसौटी पर खरी नहीं उतरती ,
पर हर चाहत का फ़साना भी नहीं बनता !
हर अरमान पर हक मेरा नहीं ,
पर हर कसूर भी तेरा नहीं होता !
कुछ सितम-ए -तकदीर ,कुछ गिले शिकवे ,
हर बात का भी माज़रा नहीं होता !
कुछ महफिलें तन्हाई की ,कुछ जलसे मायूसी के ,
हर शम्मा पे कुर्बान भी परवाना नहीं होता !
हर मरहम जख्म नहीं भरता ,
हर हरा जख्म भी गवारा नहीं होता !
कुछ उदास शामें यादों की बारात की ,
हर शादी के दुल्हे का सेहरा नहीं होता !
हर दरिया दर्द का गहरा नहीं होता ,
और हर गैर शख्स , अनजान चेहरा नहीं होता !
अकेला निकल सकता था वो और कारवाँ भी बन जाता,
अगर वो तेरे लिए ठहरा नहीं होता , तेरे लिए ठहरा नहीं होता !

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