सीधी सच्ची सादी और सरल हो ,
ऐसी ही भोली तुम मेरी पायल हो ।
जैसे बहती हुई सरिता , सुरम्य गीतमय कल -कल हो ,
वैसी ही चंचल चपल तुम मेरी पायल हो ।
कोई सुरीला गीत या सूफी ग़ज़ल हो ,
ऐसी ही सुमधुर तुम मेरी पायल हो ।
कोई रसभरी मिठाई या एक रसीला फल हो ,
वैसी ही मीठी तुम मेरी पायल हो ।
कोई प्यारा लम्हा या आने वाला पल हो ,
वैसी ही चलित तुम मेरी पायल हो ।
पंचतत्व से उपजी अग्नि वायु पृथ्वी आकाश या जल हो
हर कण में ढली तुम मेरी पायल हो ।
चाहे धरती अंतरिक्ष या रसातल हो
हर जगह झंकृत तुम मेरी पायल हो ।
कोई पूरा सा ख्वाब इक महकता आंचल हो
मै तुम्हारा कंगन तुम मेरी पायल हो ।
मेरा विश्वास मेरा गर्व और तुम्ही मेरा संबल हो
मेरी हर अनुभूति में बसी तुम मेरी पायल हो ।
मेरी हर अनुभूति में बसी हाँ तुम मेरी पायल हो ।
ऐसी ही भोली तुम मेरी पायल हो ।
जैसे बहती हुई सरिता , सुरम्य गीतमय कल -कल हो ,
वैसी ही चंचल चपल तुम मेरी पायल हो ।
कोई सुरीला गीत या सूफी ग़ज़ल हो ,
ऐसी ही सुमधुर तुम मेरी पायल हो ।
कोई रसभरी मिठाई या एक रसीला फल हो ,
वैसी ही मीठी तुम मेरी पायल हो ।
कोई प्यारा लम्हा या आने वाला पल हो ,
वैसी ही चलित तुम मेरी पायल हो ।
पंचतत्व से उपजी अग्नि वायु पृथ्वी आकाश या जल हो
हर कण में ढली तुम मेरी पायल हो ।
चाहे धरती अंतरिक्ष या रसातल हो
हर जगह झंकृत तुम मेरी पायल हो ।
कोई पूरा सा ख्वाब इक महकता आंचल हो
मै तुम्हारा कंगन तुम मेरी पायल हो ।
मेरा विश्वास मेरा गर्व और तुम्ही मेरा संबल हो
मेरी हर अनुभूति में बसी तुम मेरी पायल हो ।
मेरी हर अनुभूति में बसी हाँ तुम मेरी पायल हो ।
