हाँ ये सपने हैं ये सपने कुछ पराये कुछ अपने
कुछ पक्के कुछ कच्चे कुछ झूठे कुछ सच्चे
कभी होते कहीं पूरे कभी रहते ये अधूरे
कभी बोल -बोल में कभी सुन -सुन में कभी बातों की उधेड़-बुन में
कभी वक़्त में थमे- थमे से कभी वादियों में जमे -जमे से
कभी रुनझुन कभी रिमझिम कभी गुनगुन कहीं टिमटिम
कभी आसमान के तारों में कभी नदिया के किनारों में
कभी बगिया के गलियारों में कभी पुराने यारों में
कुछ आसुओं से भरे से कुछ खिलखिलाए से खरहरे से
कभी ख्वाबों के गुलशन में कभी यादों की चिल्मन में
हाँ ये सपने हैं ये सपने नहीं पराये है ये अपने......
Friday, November 12, 2010
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छोटे बड़े सपने
जिंदगी की रेल में हम सब अलग अलग स्टेशन से चढ़े हैं।। निकले हैं अपनी मंज़िल की ओर , सपने कुछ छोटे कुछ बड़े हैं। रास्ते में अड़चनें हज़ार, और कई...
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सीधी सच्ची सादी और सरल हो , ऐसी ही भोली तुम मेरी पायल हो । जैसे बहती हुई सरिता , सुरम्य गीतमय कल -कल हो , वैसी ही चंच...
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कभी हंसी कभी रुलाई कभी ख़ुशी कभी गम मुझे अपने जस्बातों में बहने दो ! हाँ मै पागल हूँ मुझे पागल रहने दो ...... कभी झूटी कभी सच्ची कभी बु...
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हाँ ये सपने हैं ये सपने कुछ पराये कुछ अपने कुछ पक्के कुछ कच्चे कुछ झूठे कुछ सच्चे कभी होते कहीं पूरे कभी रहते ये अधूरे कभी बोल -बोल में कभी ...