Friday, November 12, 2010

Sapne Kuch Apne

हाँ ये सपने हैं ये सपने कुछ पराये कुछ अपने
कुछ पक्के कुछ कच्चे कुछ झूठे कुछ सच्चे

कभी होते कहीं पूरे कभी रहते ये अधूरे
कभी बोल -बोल में कभी सुन -सुन में कभी बातों की उधेड़-बुन में

कभी वक़्त में थमे- थमे से कभी वादियों में जमे -जमे से
कभी रुनझुन कभी रिमझिम कभी गुनगुन कहीं टिमटिम

कभी आसमान के तारों में कभी नदिया के किनारों में
कभी बगिया के गलियारों में कभी पुराने यारों में

कुछ आसुओं से भरे से कुछ खिलखिलाए से खरहरे से
कभी ख्वाबों के गुलशन में कभी यादों की चिल्मन में
हाँ ये सपने हैं ये सपने नहीं पराये है ये अपने......


छोटे बड़े सपने

 जिंदगी की रेल में हम सब अलग अलग स्टेशन से  चढ़े हैं।। निकले हैं अपनी मंज़िल की ओर , सपने कुछ छोटे कुछ बड़े हैं।  रास्ते में अड़चनें हज़ार, और कई...