जगाता हूँ सीने में ढेर सारे अरमान ,
फिर धीरे से इन्हें थपकी देकर सुलाता हूँ ||
जलाता हूँ शम्मे-ऐ- आरज़ू शामों को
फिर चुपचाप सुबह धीरे से फूँककर बुझाता हूँ ||
बोलता हूँ ढेर सारे लव्ज़ तेरी तारीफों में
फिर इन लबों को ऊँगली रखके चुप कराता हूँ ||
सजाता हूँ ढेर सारे सुरीले सपने तेरे , नींदों में
फिर वास्तविकता में आँखें मलता जाग जाता हूँ ||
लिखता हूँ हज़ारों नगमे तेरे तोहफों में
फिर लिखके बार बार मिटाता हूँ ||
न जाने क्यों , हर याद में, हर बात में
मेरे हर दिन में मेरी हर रात में
कभी तुझे खोता हूँ , कभी तुझे पाता हूँ
कभी तुझे खोता हूँ , कभी तुझे पाता हूँ||
फिर धीरे से इन्हें थपकी देकर सुलाता हूँ ||
जलाता हूँ शम्मे-ऐ- आरज़ू शामों को
फिर चुपचाप सुबह धीरे से फूँककर बुझाता हूँ ||
बोलता हूँ ढेर सारे लव्ज़ तेरी तारीफों में
फिर इन लबों को ऊँगली रखके चुप कराता हूँ ||
सजाता हूँ ढेर सारे सुरीले सपने तेरे , नींदों में
फिर वास्तविकता में आँखें मलता जाग जाता हूँ ||
लिखता हूँ हज़ारों नगमे तेरे तोहफों में
फिर लिखके बार बार मिटाता हूँ ||
न जाने क्यों , हर याद में, हर बात में
मेरे हर दिन में मेरी हर रात में
कभी तुझे खोता हूँ , कभी तुझे पाता हूँ
कभी तुझे खोता हूँ , कभी तुझे पाता हूँ||
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