Sunday, May 28, 2017

ऐ ज़िन्दगी!!

दे जितनी चुनौती  है तुझे ऐ ज़िन्दगी ,
मैं  उम्मीदों  के सहारे इन्हें जी लूंगा |

दे  जितने आंसूं देना है  तुझे मुझको ,
मैं गुजरी खुशियों को समेटकर इन्हें पी लूंगा |

दे  जितनी रुसवाई तू दे सकती मुझे ,
मैं अपनों  के हौसलों को समेटकर  बार बार खिलूँगा |

दे जितनी उदासी  देनी है तुझे मुझको ,
मैं ख्वाबों के लम्हों में लपेटकर, इन्हे सी लूंगा |

ऐ जिंदगी , दे जितना दर्द दे सकती है तू ,
मैं ज़ख़्मों में अपनों का प्यार लगाकर सह लूंगा |


तुझे क्या पता ज़िन्दगी की तू कितनी खूबसूरत है,
तेरे हर पल में कितना रंग , कितनी आस है

मुझे उनको जीने के अरमान और उनको पीने की कितनी प्यास है |
मैं तो अपनों के सपनों को हकीकत में बदलकर,
मज़े तुझसे भी, तुझमे ही लूंगा , मज़े तुझसे ही तुझमे भी लूंगा || 

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