Saturday, November 22, 2014

हाँ तुम मेरी पायल हो !

सीधी  सच्ची  सादी  और  सरल  हो ,  
ऐसी  ही  भोली  तुम मेरी  पायल  हो । 

जैसे  बहती हुई सरिता , सुरम्य  गीतमय  कल -कल  हो ,
 वैसी ही चंचल  चपल तुम मेरी  पायल  हो । 

 कोई  सुरीला  गीत या  सूफी ग़ज़ल  हो ,
ऐसी  ही  सुमधुर  तुम मेरी पायल हो  । 

कोई रसभरी मिठाई  या एक  रसीला फल हो ,
वैसी ही  मीठी   तुम मेरी पायल हो  । 

कोई  प्यारा  लम्हा या आने वाला पल हो ,
वैसी  ही  चलित  तुम मेरी पायल हो  । 

पंचतत्व से उपजी अग्नि वायु पृथ्वी आकाश या जल हो 
हर कण में ढली तुम मेरी पायल हो । 






















चाहे धरती अंतरिक्ष या रसातल हो 
हर जगह झंकृत तुम मेरी पायल हो  । 

कोई  पूरा  सा ख्वाब इक महकता आंचल हो 
मै  तुम्हारा कंगन  तुम मेरी पायल हो  । 

मेरा विश्वास मेरा गर्व और तुम्ही मेरा संबल हो 
मेरी हर अनुभूति में बसी तुम मेरी पायल हो । 

मेरी हर अनुभूति में बसी  हाँ तुम मेरी पायल हो । 

4 comments:

payal gupta said...

Thnx.. Very nice

Unknown said...

वाह जीजू.... बहुत अच्छी लगी कविता।

Unknown said...

Kya baat h boss ... Cha gaye tum to... very nice poetry 👏👏👍👍

Unknown said...

Kya baat h boss ... Cha gaye tum to... very nice poetry 👏👏👍👍

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