Friday, August 29, 2014

क्या तुम वही हो जो मेरे सपनो में आने वाली हो ?


उगता सूरज तेरी बिंदिया हो , चंदा तेरी बाली हो ।
क्या  तुम  वही  हो जो मेरे सपनो  में आने वाली हो !

कोई खाली थाल या रोली कुमकुम से भरी पूजा की थाली हो।
क्या  तुम  वही  हो जो मेरे सपनो  में आने वाली हो !

कड़वा  सच या मीठी  सी गाली हो ।
क्या  तुम  वही  हो जो मेरे सपनो  में आने वाली हो !

सूखे पत्तों की डगाल या फूलों से भरी हुई डाली हो।
क्या  तुम  वही  हो जो मेरे सपनो  में आने वाली हो !


बाग़ उजाड़ने वाला उच्च्श्रङ्ख्ल  बच्चा या मन  की बगिया सजाने वाली माली हो।
क्या  तुम  वही  हो जो मेरे सपनो  में आने वाली हो !

खुशियों से लबालब भरा जाम या गम से लबरेज़ गिलास खाली हो ।
क्या  तुम  वही  हो जो मेरे सपनो  में आने वाली हो !

नया खरा  सिक्का या  कोई नोट जाली हो ।
क्या  तुम  वही  हो जो मेरे सपनो  में आने वाली हो !

सन्नाटे की आहट या गड़गड़ाती हुई ताली हो ।
क्या  तुम  वही  हो जो मेरे सपनो  में आने वाली हो !

एक चैन भरा एहसास या कोई पुलाव ख्याली हो ।
क्या  तुम  वही  हो जो मेरे सपनो  में आने वाली हो !



तुम मंदिर की आरती, मस्जिद की अजान और साईं दरबार  की सवाली हो
भगवान की बनाई  कठपुतली या वो  सजीव देवी-प्रतिमा जो मिट्टी में  ढाली हो

आबाद  हुई  इक  मुराद जो खुदा ने बार बार टाली हो।
पूरी  हुई ख्वाइश जो  मैंने बरसों से पाली हो!

क्या  तुम  वही  हो जो मेरे सपनो  में आने वाली हो !
हाँ तुम   वही  हो जो मेरे सपनो  में आने वाली हो !

हाँ तुम   वही  हो जो मेरे सपनो  में आने वाली हो !!!

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