तुम ही चुपाते थे मुझे , आँखों से आँसू पोंछकर
जब मै स्कूल जाने में रोता था
तुम ही उठाते थे मुझे , हलके से बालों को सहलाके
जब मै ठण्ड में कम्बल ओढके सोता था
तुम ही चिढाते थे मुझे कभी,
जब मै किसी बात की खीज में होता था
और तुम ही समझाते थे मुझे प्यार से,
जब मै ज़िद में अपना आपा खोता था
तुम ही सिखाते थे मुझे पढना समझ समझ के,
मै तो निरा रट्टू तोता था
तुम ही बिगाड़ते भी थे मुझे लाड़ प्यार से
क्यूँकि मै दादा का प्यारा पोता था
तुम ही सँभालते थे मुझे पकडके,
जब साइकिल सीखने में मेरा हैंडल डोलता था
तुम ही डाँटते थे मुझे जोर से
जब पहली बारिश में अपने कपडे भगोता था
पर पुचकारते भी तुम्ही थे प्यार से
जब छीकते हुए उन्हें पंखे के नीचे सुखोता था
देखते थे दुलार भरे नैनों से
जब मिटटी में पैसे बोता था
पर क्या तुमको पता है 'पापा'
मै पैसे नहीं आशाओं को संजोता था
मेरे भोले मन को ये विश्वास था ,
की मैंने उम्मीदों से भरी मिटटी की क्यारी को जोता था
कि इससे इक खुशियों भरी बेल फूटेगी
इन्ही नन्हे सपनों अपनी आँखों में पिरोता था
जब मै बिलकुल छोता था , जब मै बिलकुल छोता था
जब मै स्कूल जाने में रोता था
तुम ही उठाते थे मुझे , हलके से बालों को सहलाके
जब मै ठण्ड में कम्बल ओढके सोता था
तुम ही चिढाते थे मुझे कभी,
जब मै किसी बात की खीज में होता था
और तुम ही समझाते थे मुझे प्यार से,
जब मै ज़िद में अपना आपा खोता था
तुम ही सिखाते थे मुझे पढना समझ समझ के,
मै तो निरा रट्टू तोता था
तुम ही बिगाड़ते भी थे मुझे लाड़ प्यार से
क्यूँकि मै दादा का प्यारा पोता था
तुम ही सँभालते थे मुझे पकडके,
जब साइकिल सीखने में मेरा हैंडल डोलता था
तुम ही डाँटते थे मुझे जोर से
जब पहली बारिश में अपने कपडे भगोता था
पर पुचकारते भी तुम्ही थे प्यार से
जब छीकते हुए उन्हें पंखे के नीचे सुखोता था
देखते थे दुलार भरे नैनों से
जब मिटटी में पैसे बोता था
पर क्या तुमको पता है 'पापा'
मै पैसे नहीं आशाओं को संजोता था
मेरे भोले मन को ये विश्वास था ,
की मैंने उम्मीदों से भरी मिटटी की क्यारी को जोता था
कि इससे इक खुशियों भरी बेल फूटेगी
इन्ही नन्हे सपनों अपनी आँखों में पिरोता था
जब मै बिलकुल छोता था , जब मै बिलकुल छोता था

1 comment:
Awesome. Keep it up!!!
Post a Comment