Sunday, March 17, 2013

Teri Tareefon Ki Rangoli

वो है बहुत मासूम , वो है बहुत भोली
जैसे पूजा की सजी थाली में कुमकुम और  रोली

वो जब खिलखिलाए ,
जैसे बहारों में खिली हों फूलों की टोली

वो जब बोले मीठे बोल ,
जैसे कोकिल की प्यारी सी बोली

वो जब चले खुद में सिमटे हुए ,
जैसे हवाओं में खुशबू सी डोली

वो जब देखे हरी झील से नैनों से
जैसे मन की हर बात उसने टटोली

वो जब सोये अपने आँचल में लिपटके
जैसे रात में किसी ने नींद  सी घोली

वो जब जागे आहें भरके
जैसे अलसाई सी  सुबह ने अपनी आँखें खोली


वो जब ख्वाब देखे तो
जैसे उम्मीदें खेल रही हों आँख मिचोली 

वो जब रोये तो लगे
जैसे मोतियों की माला अपनी पलकों में पिरोली



वो जब मुस्कराए और धीमे से  हँसे तो
जैसे मन की सारी  मैल धोली

वो जब ख़ुशी से चेहके तो
जैसे सौगातों  की भर गयी हो झोली

उसकी यादों के रंगों से जैसे 
खेली ढेर सारी  होली

और उसकी तारीफ में सजाई है ये
पंक्तियों की छोटी सी रंगोली

तेरी तारीफ की रंगोली.....









No comments:

छोटे बड़े सपने

 जिंदगी की रेल में हम सब अलग अलग स्टेशन से  चढ़े हैं।। निकले हैं अपनी मंज़िल की ओर , सपने कुछ छोटे कुछ बड़े हैं।  रास्ते में अड़चनें हज़ार, और कई...