तुम रोती हो तो सागर जम जाता है,
तुम हंसती हो तो गम कम जाता है!
तुम बोलती हो तो वक़्त रम जाता है,
तुम चुपती हो तो लम्हा थम जाता है!
तुम चलती हो तो रास्ता रुक जाता है
तुम रूकती हो तो आसमां झुक जाता है!
तुम गाती हो तो तो गीत में सरगम सा आता है,
तुम नाचती हो तो नृत्य में समागम सा छाता है!
तुम सोती हो तो वो रात का जगराता है,
तुम जगती हो तो सबेरा उनींदा हो जाता है!
आफ़ताब ठंडक दे रहा है
बर्फ से तपिश आ रहा है !
मरहम को जख्म सा होने लगा है
और जख्म से चैन सा आ रहा है..
नजदीकियां हो रही हैं दूर,
और फासला पास आ रहा है!
तेरा जाना ज़िन्दगी के लिए भी मौत का साया है
और तेरा होना मौत के लिए भी ज़िन्दगी का सरमाया है!
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