Saturday, May 15, 2010

ओ माँ !

नम है ये धरती और भीगा है आसमां,
आती है याद तेरे आँचल की आस माँ

तेरी कहानियां वो किस्से वो झिड़की वो बातें,
वो थपकी प्यारी भपकी वो सब कुछ था खास माँ

वो आटे से सना आँचल, वो माथे का पसीना,
वो हाथों में बेलन, आज सब कुछ है उदास माँ

वो आलू का परांठा वो ताज़ा मथा मठा
आती है तेरी रसोई से वो घी की सुवास माँ

वो बुलाना वो बनाना वो बनाके फिर खिलाना,
वो खिलाके फिर पिलाना और मिटाना मेरी प्यास माँ

वो प्यारी सी बोली वो सूरत इतनी भोली
वो फेरना माथे पर हाथ, कुछ जादू था तेरे पास माँ

वो छुपना तेरे दामन में वो सोना तेरी गोद में
आ सकता वो वापस हो सकता सच काश माँ

वो चंदा तेरी बिंदी, वो तारे तेरे बाले,
वो चमक तेरे नैनों की जैसे सूर्य का प्रकाश माँ

नित करता हूँ स्मरण अब यादों की है शरण
ऋणी है तेरा, हर आता जाता मेरा श्वास माँ

तेरी छाया जैसे पीपल तेरा स्पर्श कितना शीतल
तेरे विराट स्वरुप में जैसे इश्वर का वास माँ
तेरे विराट स्वरुप में है इश्वर का वास माँ



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